Panchang – Click Jyotish https://clickjyotish.in Keep Astrology Simple Wed, 11 Dec 2024 07:17:42 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 मोक्षदा एकादशी https://clickjyotish.in/mokshada-ekadashi/ https://clickjyotish.in/mokshada-ekadashi/#respond Wed, 11 Dec 2024 07:16:52 +0000 https://clickjyotish.in/?p=75 मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी संवत् २०८१ तदनुसार बुधवार, 11 दिसम्बर 2024 इसी शुभ तिथि को श्रीभगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर समस्त मानवजाति के कल्याण के लिए कुरुक्षेत्र रणांगण में गीता का दिव्य उपदेश दिया था। मोक्षदा एकादशी की कथा महाराज युधिष्ठिर ने कहा- हे भगवन! आप तीनों लोकों के स्वामी, सबको सुख देने वाले और […]

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मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी संवत् २०८१ तदनुसार बुधवार, 11 दिसम्बर 2024

इसी शुभ तिथि को श्रीभगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर समस्त मानवजाति के कल्याण के लिए कुरुक्षेत्र रणांगण में गीता का दिव्य उपदेश दिया था।

मोक्षदा एकादशी की कथा

महाराज युधिष्ठिर ने कहा- हे भगवन! आप तीनों लोकों के स्वामी, सबको सुख देने वाले और जगत के पति हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूं। हे देव! आप सबके हितैषी हैं अत: मेरे संशय को दूर कर मुझे बताइये कि मार्गशीर्ष एकादशी का क्या नाम है? उस दिन कौन-से देवता का पूजन किया जाता है और उसकी क्या विधि है? कृपया मुझे बताएं।

भक्तवत्सल भगवान श्री कृष्ण कहने लगे कि धर्मराज, तुमने बड़ा ही उत्तम प्रश्न किया है। इसके सुनने से तुम्हारा यश संसार में फैलेगा। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी अनेक पापों को नष्ट करने वाली है। इसका नाम मोक्षदा एकादशी है। इस दिन दामोदर भगवान की धूप-दीप, नैवेद्य आदि से भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। अब इस विषय में मैं एक पुराणों की कथा कहता हूं।

गोकुल नाम के नगर में वैखानस नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में चारों वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण रहते थे। वह राजा अपनी प्रजा का पुत्रवत पालन करता था। एक बार रात्रि में राजा ने एक स्वप्न देखा कि उसके पिता नरक में हैं। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ।

प्रात: वह विद्वान ब्राह्मणों के पास गया और अपना स्वप्न सुनाया। कहा- मैंने अपने पिता को नरक में कष्ट उठाते देखा है। उन्होंने मुझसे कहा कि- हे पुत्र मैं नरक में पड़ा हूं। यहां से तुम मुझे मुक्त कराओ। जब से मैंने ये वचन सुने हैं तब से मैं बहुत बेचैन हूं। चित्त में बड़ी अशांति हो रही है।

मुझे इस राज्य, धन, पुत्र, स्त्री, हाथी, घोड़े आदि में कुछ भी सुख प्रतीत नहीं होता। क्या करूं? राजा ने कहा हे ब्राह्मण देवताओं! इस दु:ख के कारण मेरा सारा शरीर जल रहा है। अब आप कृपा करके कोई तप, दान, व्रत आदि ऐसा उपाय बताइए जिससे मेरे पिता को मुक्ति मिल जाए। उस पुत्र का जीवन व्यर्थ है जो अपने माता-पिता का उद्धार न कर सके। एक उत्तम पुत्र जो अपने माता-पिता तथा पूर्वजों का उद्धार करता है, वह हजार मूर्ख पुत्रों से अच्छा है। जैसे एक चंद्रमा सारे जगत में प्रकाश कर देता है, परंतु हजारों तारे नहीं कर सकते।

ब्राह्मणों ने कहा- हे राजन! यहां पास ही भूत, भविष्य, वर्तमान के ज्ञाता पर्वत ऋषि का आश्रम है। आपकी समस्या का हल वे जरूर करेंगे। यह सुनकर राजा मुनि के आश्रम पर गया। उस आश्रम में अनेक शांत चित्त योगी और मुनि तपस्या कर रहे थे। उसी जगह पर्वत मुनि बैठे थे। राजा ने मुनि को साष्टांग दंडवत किया। मुनि ने राजा से कुशलता के समाचार लिये।

राजा ने कहा कि महाराज आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशल हैं, लेकिन अकस्मात मेरे चित्त में अत्यंत अशांति होने लगी है। ऐसा सुनकर पर्वत मुनि ने आंखें बंद की और भूत विचारने लगे।

फिर बोले हे राजन! मैंने योग के बल से तुम्हारे पिता के कुकर्मों को जान लिया है। उन्होंने पूर्व जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को रति दी, किंतु सौत के कहने पर दूसरी पत्नी को ऋतुदान मांगने पर भी नहीं दिया। उसी पाप कर्म के कारण तुम्हारे पिता को नरक में जाना पड़ा।

तब राजा ने कहा इसका कोई उपाय बताइए। मुनि बोले- हे राजन! आप मार्गशीर्ष एकादशी का उपवास करें और उस उपवास के पुण्य को अपने पिता को संकल्प कर दें। इसके प्रभाव से आपके पिता की अवश्य ही नरक से मुक्ति होगी। मुनि के ये वचन सुनकर राजा महल में आया और मुनि के कहे अनुसार कुटुंब सहित मोक्षदा एकादशी का व्रत किया। इसके उपवास का पुण्य उसने पिता को अर्पण कर दिया। इसके प्रभाव से उसके पिता को मुक्ति मिल गई और स्वर्ग में जाते हुए वे पुत्र से कहने लगे- हे पुत्र! तेरा कल्याण हो।
मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का जो व्रत करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इस कथा को पढ़ने या सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह व्रत चिंतामणी के समान सब कामनाएं पूर्ण करने वाला तथा मोक्ष देता है। इस व्रत से बढ़कर मोक्ष देने वाला और कोई व्रत नहीं है।

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कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष क्या है? https://clickjyotish.in/%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95/ https://clickjyotish.in/%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95/#respond Mon, 10 Jun 2024 15:51:04 +0000 https://clickjyotish.in/?p=7 जब हम धार्मिक त्योहारों और कार्यक्रमों की बात करते हैं, तो हमारे सामने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दो बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द हैं। कृष्ण पक्ष क्या है? कृष्ण पक्ष, हिन्दू पंचांग में पाढ़ने वाले मास के दूसरे हिस्से को कहा जाता है। यह पक्ष नए चाँद के आने के बाद शुरू होता है और […]

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  1. परिचय
  2. कृष्ण पक्ष क्या है?
  3. कृष्ण पक्ष के दिन
  4. कृष्णक्ष के महत्व
  5. शुक्ल पक्ष क्या है?
  6. शुक्ल पक्ष के दिन
  7. शुक्ल पक्ष के महत्व
  8. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के अंतर
  9. कृष्ण पक्ष और शु्ल पक्ष का महत्व
  10. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का पालन
  11. भारतीय परंपरा में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष
  12. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के उपाय
  13. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के प्रभाव
  14. धार्मिक संस्कार और कृष्ण-शुक्ल पक्ष
  15. निष्कर्ष

जब हम धार्मिक त्योहारों और कार्यक्रमों की बात करते हैं, तो हमारे सामने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दो बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द हैं।

कृष्ण पक्ष क्या है?

कृष्ण पक्ष, हिन्दू पंचांग में पाढ़ने वाले मास के दूसरे हिस्से को कहा जाता है। यह पक्ष नए चाँद के आने के बाद शुरू होता है और पूर्णिमा तक चलता है।

कृष्ण पक्ष के दिन

कृष्ण पक्ष में गुरुवार, शनिवार और रविवार शास्त्रगुरु ध्यान के दिन माने जाते हैं। इन दिनों पूजन और ध्यान का विशेष महत्व होता है।

कृष्ण पक्ष के महत्व

कृष्ण पक्ष में माँ काली और भैरव की पूजा का विशेष महत्व है। इस मास में यज्ञ और धार्मिक क्रियाएं भी ध्यानवानी बनाती हैं।

शुक्ल पक्ष क्या है?

शुक्ल पक्ष, पालने वाले माह में चाँद फलने के बाद पहले हिस्से को कहा जाता है। इस पक्ष में अमावस्या तक चलता है।

शुक्ल पक्ष के दिन

शुक्ल पक्ष में बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार गुरु-पुष्प ध्यान के दिन कहलाते हैं। इन दिनों धार्मिक क्रियाएं और पूजा की जाती है।

शुक्ल पक्ष के महत्व

शुक्ल पक्ष में माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा विशेष महत्व रखती है। इस पक्ष में शुभ क्रियाएं और पुण्य कर्म अधिक फलदायी माने जाते हैं।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के अंतर

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। कृष्ण पक्ष में अंधेरा बढ़ता है जबकि शुक्ल पक्ष में ज्योति की वृद्धि होती है।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का महत्व

दोनों पक्षों का अपना महत्व है। कृष्ण पक्ष में आत्मविश्वास और साहस की उच्चता होती है जबकि शुक्ल पक्ष में शुभता और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का पालन

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का पालन करके हम अपने जीवन में सकारात्मकता और स्थिरता ला सकते हैं। इन पक्षों के महत्व को समझकर हम अपने जीवन में सुधार कर सकते हैं।

भारतीय परंपरा में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष

भारतीय परंपरा में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। इन पक्षों के महत्व को ध्यान में रखकर धार्मिक क्रियाएं और पूजन किया जाता है।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के उपाय

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के दौरान नियमित ध्यान, प्रार्थना, और पूजा करने से हम अपने आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं। ये प्रयास हमें मन, वाणी और कर्म से पवित्र बनाते हैं।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के प्रभाव

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के उपायों का पालन करने से हमारे जीवन में सुख, शांति और संपत्ति की वृद्धि होती है। इन पक्षों का अनुसरण करके हम आत्मिक उन्नति और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

धार्मिक संस्कार और कृष्ण-शुक्ल पक्ष

धार्मिक संस्कारों में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का महत्वपूर्ण स्थान है। इन पक्षों के उपाय से हम अपने आत्मिक संयम को बढ़ा सकते हैं।

निष्कर्ष

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों ही हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन पक्षों के महत्व को समझकर हम अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

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