Click Jyotish https://clickjyotish.in Keep Astrology Simple Tue, 07 Jan 2025 12:15:10 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 Sani Peyarchi 2025 (Saturn Transit 2025) https://clickjyotish.in/sani-peyarchi-2025/ https://clickjyotish.in/sani-peyarchi-2025/#respond Tue, 07 Jan 2025 05:48:47 +0000 https://clickjyotish.in/?p=78 शनि का पेयार्ची का अर्थ है शनि का गोचर। यानी गोचर में शनि ग्रह का किसी एक राशि से दूसरी राशि में जाना। क्यों कि भचक्र में राशियाँ स्थिर है और सभी नवग्रह इन राशियों में गोचर करते रहते हैं और सभी मनुष्यों के जीवन में ग्रहों के इन्हीं गोचर के कारण सुख दुख, उतार […]

The post Sani Peyarchi 2025 (Saturn Transit 2025) appeared first on Click Jyotish.

]]>
शनि का पेयार्ची का अर्थ है शनि का गोचर। यानी गोचर में शनि ग्रह का किसी एक राशि से दूसरी राशि में जाना।

क्यों कि भचक्र में राशियाँ स्थिर है और सभी नवग्रह इन राशियों में गोचर करते रहते हैं और सभी मनुष्यों के जीवन में ग्रहों के इन्हीं गोचर के कारण सुख दुख, उतार चढ़ाव, अच्छा बुरा समय आता है 

सबसे अधिक प्रभाव शनि और बृहस्पति ग्रहों के गोचर का होता है। जहां गुरु एक बार भचक्र को 12 वर्ष में पूरा करते है वही शनि इस पर चक्र को पूरा करने में 30 वर्ष का समय लेते है। यानी गुरु एक राशि में जहां 1 वर्ष तक रहते हैं वही शनि एक राशि में 2.5 वर्ष तक रहते हैं।

तो यह तो स्वाभाविक है कि किसी भी मनुष्य के जीवन में अधिक प्रभाव इन दोनों ग्रहों का ही है 

इस दृष्टि से वर्ष 2025 में शनि का गोचर भी बहुत महत्वपूर्ण है। शनि जो काल, समय, न्याय, अधिकार, सेवा का प्रतिनिधित्व करते हैं वह 27 दिसंबर सन 2024 को पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में गोचर कर गए हैं। जिस नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति यानी गुरु है। इसी के साथ 28 अप्रैल 2025 को शनि मीन राशि में प्रवेश करेंगे जिसके स्वामी बृहस्पति यानी गुरु ही है 

तो कितना महत्वपूर्ण है यह वर्ष 2025।

इसका अनुमान हम इस तरह लगा सकते हैं कि काल, समय, न्याय के कारक गृह :- शनि और धर्म, अध्यात्म, शिक्षा, उत्थान के कारक :- गुरु का एक साथ जब किसी व्यक्ति के जीवन में प्रभाव होगा तो वह कितना बदलाव लेकर आएगा और क्या यह बदलाव अच्छा होगा या बुरा ? इसका सिर्फ हम अनुमान लगा सकते हैं।

इस बात को और अधिक समझने के लिए हम पहले पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र की बात करते हैं 

27 नक्षत्र में से यह नक्षत्र 25वा नक्षत्र है इसमें नक्षत्र के स्वामी ग्रह गुरु है इस नक्षत्र के तीन चरण कुंभ राशि में (जो कि शनि की स्व राशि है) और एक चरण मीन राशि में (जो कि गुरु की राशि है)

तो यहां हमें इस तत्व को समझना है कि शनि इस नक्षत्र में जब तक कुंभ राशि वाले चरण में रहेंगे। तब तक वह अपने कार्यकत्व में प्रबल होंगे और जब भी मीन राशि वाले चरण में रहेंगे तब व्यक्ति के जीवन में गुरु (ब्रहस्पति) के कार्यकत्व का प्रभाव अधिक रहेगा

इसी कारण प्रतीक राशि और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उनकी स्वयं की जन्म कुंडली के आधार पर मिला-जुला प्रभाव रहेगा । 

किसी व्यक्ति के जीवन में शनि की ढैया या साडेसाती समाप्त होगी तो किसी के जीवन में इनका आरंभ होगा 

To teachers doctor consultants, yoga teachers, health coaches, travel agencies import export  इन सब कामों से जुड़े जातकों को सफलता मिलेगी और शनि की बुरी स्थिति या दशा के अनुसार व्यक्ति को बीमारी, झगड़ा, कामों में रुकावट आदि भी भोगना पड़ सकता है। 

तो सभी 12 राशियों पर शनि की पेयार्ची का एक मोटे तौर पर अच्छा प्रभाव रहेगा सन 2025 में। लेकिन प्रत्येक व्यक्ति की अपनी जन्म कुंडली के अनुसार शनि की स्थिति के अनुसार ही अच्छे या बुरे फल प्राप्त होंगे। 

प्राया: ज्योतिष के विद्वान व्यक्ति अलग-अलग प्रकार के उपाय इस संदर्भ में बताते हैं और सभी एकमत पर सहमत हैं कि चुकि शनि कर्म के देवता है। हमारे कर्मों के अनुसार फल देते हैं।

अतः सन 2025 में शनि के सुंदर गोचर का अधिक से अधिक सफल प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे कर्म करने का प्रयत्न करना चाहिए ताकि शनि देव शुभ फल और शुभ आशीष हमें प्रदान करें और सन 2025 सभी के लिए शनिदेव और बृहस्पति देव के दोहरे आशीर्वाद से भरपूर हो।

The post Sani Peyarchi 2025 (Saturn Transit 2025) appeared first on Click Jyotish.

]]>
https://clickjyotish.in/sani-peyarchi-2025/feed/ 0
मोक्षदा एकादशी https://clickjyotish.in/mokshada-ekadashi/ https://clickjyotish.in/mokshada-ekadashi/#respond Wed, 11 Dec 2024 07:16:52 +0000 https://clickjyotish.in/?p=75 मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी संवत् २०८१ तदनुसार बुधवार, 11 दिसम्बर 2024 इसी शुभ तिथि को श्रीभगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर समस्त मानवजाति के कल्याण के लिए कुरुक्षेत्र रणांगण में गीता का दिव्य उपदेश दिया था। मोक्षदा एकादशी की कथा महाराज युधिष्ठिर ने कहा- हे भगवन! आप तीनों लोकों के स्वामी, सबको सुख देने वाले और […]

The post मोक्षदा एकादशी appeared first on Click Jyotish.

]]>
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी संवत् २०८१ तदनुसार बुधवार, 11 दिसम्बर 2024

इसी शुभ तिथि को श्रीभगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर समस्त मानवजाति के कल्याण के लिए कुरुक्षेत्र रणांगण में गीता का दिव्य उपदेश दिया था।

मोक्षदा एकादशी की कथा

महाराज युधिष्ठिर ने कहा- हे भगवन! आप तीनों लोकों के स्वामी, सबको सुख देने वाले और जगत के पति हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूं। हे देव! आप सबके हितैषी हैं अत: मेरे संशय को दूर कर मुझे बताइये कि मार्गशीर्ष एकादशी का क्या नाम है? उस दिन कौन-से देवता का पूजन किया जाता है और उसकी क्या विधि है? कृपया मुझे बताएं।

भक्तवत्सल भगवान श्री कृष्ण कहने लगे कि धर्मराज, तुमने बड़ा ही उत्तम प्रश्न किया है। इसके सुनने से तुम्हारा यश संसार में फैलेगा। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी अनेक पापों को नष्ट करने वाली है। इसका नाम मोक्षदा एकादशी है। इस दिन दामोदर भगवान की धूप-दीप, नैवेद्य आदि से भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। अब इस विषय में मैं एक पुराणों की कथा कहता हूं।

गोकुल नाम के नगर में वैखानस नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में चारों वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण रहते थे। वह राजा अपनी प्रजा का पुत्रवत पालन करता था। एक बार रात्रि में राजा ने एक स्वप्न देखा कि उसके पिता नरक में हैं। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ।

प्रात: वह विद्वान ब्राह्मणों के पास गया और अपना स्वप्न सुनाया। कहा- मैंने अपने पिता को नरक में कष्ट उठाते देखा है। उन्होंने मुझसे कहा कि- हे पुत्र मैं नरक में पड़ा हूं। यहां से तुम मुझे मुक्त कराओ। जब से मैंने ये वचन सुने हैं तब से मैं बहुत बेचैन हूं। चित्त में बड़ी अशांति हो रही है।

मुझे इस राज्य, धन, पुत्र, स्त्री, हाथी, घोड़े आदि में कुछ भी सुख प्रतीत नहीं होता। क्या करूं? राजा ने कहा हे ब्राह्मण देवताओं! इस दु:ख के कारण मेरा सारा शरीर जल रहा है। अब आप कृपा करके कोई तप, दान, व्रत आदि ऐसा उपाय बताइए जिससे मेरे पिता को मुक्ति मिल जाए। उस पुत्र का जीवन व्यर्थ है जो अपने माता-पिता का उद्धार न कर सके। एक उत्तम पुत्र जो अपने माता-पिता तथा पूर्वजों का उद्धार करता है, वह हजार मूर्ख पुत्रों से अच्छा है। जैसे एक चंद्रमा सारे जगत में प्रकाश कर देता है, परंतु हजारों तारे नहीं कर सकते।

ब्राह्मणों ने कहा- हे राजन! यहां पास ही भूत, भविष्य, वर्तमान के ज्ञाता पर्वत ऋषि का आश्रम है। आपकी समस्या का हल वे जरूर करेंगे। यह सुनकर राजा मुनि के आश्रम पर गया। उस आश्रम में अनेक शांत चित्त योगी और मुनि तपस्या कर रहे थे। उसी जगह पर्वत मुनि बैठे थे। राजा ने मुनि को साष्टांग दंडवत किया। मुनि ने राजा से कुशलता के समाचार लिये।

राजा ने कहा कि महाराज आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशल हैं, लेकिन अकस्मात मेरे चित्त में अत्यंत अशांति होने लगी है। ऐसा सुनकर पर्वत मुनि ने आंखें बंद की और भूत विचारने लगे।

फिर बोले हे राजन! मैंने योग के बल से तुम्हारे पिता के कुकर्मों को जान लिया है। उन्होंने पूर्व जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को रति दी, किंतु सौत के कहने पर दूसरी पत्नी को ऋतुदान मांगने पर भी नहीं दिया। उसी पाप कर्म के कारण तुम्हारे पिता को नरक में जाना पड़ा।

तब राजा ने कहा इसका कोई उपाय बताइए। मुनि बोले- हे राजन! आप मार्गशीर्ष एकादशी का उपवास करें और उस उपवास के पुण्य को अपने पिता को संकल्प कर दें। इसके प्रभाव से आपके पिता की अवश्य ही नरक से मुक्ति होगी। मुनि के ये वचन सुनकर राजा महल में आया और मुनि के कहे अनुसार कुटुंब सहित मोक्षदा एकादशी का व्रत किया। इसके उपवास का पुण्य उसने पिता को अर्पण कर दिया। इसके प्रभाव से उसके पिता को मुक्ति मिल गई और स्वर्ग में जाते हुए वे पुत्र से कहने लगे- हे पुत्र! तेरा कल्याण हो।
मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का जो व्रत करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इस कथा को पढ़ने या सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह व्रत चिंतामणी के समान सब कामनाएं पूर्ण करने वाला तथा मोक्ष देता है। इस व्रत से बढ़कर मोक्ष देने वाला और कोई व्रत नहीं है।

The post मोक्षदा एकादशी appeared first on Click Jyotish.

]]>
https://clickjyotish.in/mokshada-ekadashi/feed/ 0
कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष क्या है? https://clickjyotish.in/%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95/ https://clickjyotish.in/%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95/#respond Mon, 10 Jun 2024 15:51:04 +0000 https://clickjyotish.in/?p=7 जब हम धार्मिक त्योहारों और कार्यक्रमों की बात करते हैं, तो हमारे सामने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दो बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द हैं। कृष्ण पक्ष क्या है? कृष्ण पक्ष, हिन्दू पंचांग में पाढ़ने वाले मास के दूसरे हिस्से को कहा जाता है। यह पक्ष नए चाँद के आने के बाद शुरू होता है और […]

The post कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष क्या है? appeared first on Click Jyotish.

]]>
  1. परिचय
  2. कृष्ण पक्ष क्या है?
  3. कृष्ण पक्ष के दिन
  4. कृष्णक्ष के महत्व
  5. शुक्ल पक्ष क्या है?
  6. शुक्ल पक्ष के दिन
  7. शुक्ल पक्ष के महत्व
  8. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के अंतर
  9. कृष्ण पक्ष और शु्ल पक्ष का महत्व
  10. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का पालन
  11. भारतीय परंपरा में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष
  12. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के उपाय
  13. कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के प्रभाव
  14. धार्मिक संस्कार और कृष्ण-शुक्ल पक्ष
  15. निष्कर्ष

जब हम धार्मिक त्योहारों और कार्यक्रमों की बात करते हैं, तो हमारे सामने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दो बहुत ही महत्वपूर्ण शब्द हैं।

कृष्ण पक्ष क्या है?

कृष्ण पक्ष, हिन्दू पंचांग में पाढ़ने वाले मास के दूसरे हिस्से को कहा जाता है। यह पक्ष नए चाँद के आने के बाद शुरू होता है और पूर्णिमा तक चलता है।

कृष्ण पक्ष के दिन

कृष्ण पक्ष में गुरुवार, शनिवार और रविवार शास्त्रगुरु ध्यान के दिन माने जाते हैं। इन दिनों पूजन और ध्यान का विशेष महत्व होता है।

कृष्ण पक्ष के महत्व

कृष्ण पक्ष में माँ काली और भैरव की पूजा का विशेष महत्व है। इस मास में यज्ञ और धार्मिक क्रियाएं भी ध्यानवानी बनाती हैं।

शुक्ल पक्ष क्या है?

शुक्ल पक्ष, पालने वाले माह में चाँद फलने के बाद पहले हिस्से को कहा जाता है। इस पक्ष में अमावस्या तक चलता है।

शुक्ल पक्ष के दिन

शुक्ल पक्ष में बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार गुरु-पुष्प ध्यान के दिन कहलाते हैं। इन दिनों धार्मिक क्रियाएं और पूजा की जाती है।

शुक्ल पक्ष के महत्व

शुक्ल पक्ष में माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा विशेष महत्व रखती है। इस पक्ष में शुभ क्रियाएं और पुण्य कर्म अधिक फलदायी माने जाते हैं।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के अंतर

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। कृष्ण पक्ष में अंधेरा बढ़ता है जबकि शुक्ल पक्ष में ज्योति की वृद्धि होती है।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का महत्व

दोनों पक्षों का अपना महत्व है। कृष्ण पक्ष में आत्मविश्वास और साहस की उच्चता होती है जबकि शुक्ल पक्ष में शुभता और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का पालन

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का पालन करके हम अपने जीवन में सकारात्मकता और स्थिरता ला सकते हैं। इन पक्षों के महत्व को समझकर हम अपने जीवन में सुधार कर सकते हैं।

भारतीय परंपरा में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष

भारतीय परंपरा में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। इन पक्षों के महत्व को ध्यान में रखकर धार्मिक क्रियाएं और पूजन किया जाता है।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के उपाय

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के दौरान नियमित ध्यान, प्रार्थना, और पूजा करने से हम अपने आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं। ये प्रयास हमें मन, वाणी और कर्म से पवित्र बनाते हैं।

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के प्रभाव

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के उपायों का पालन करने से हमारे जीवन में सुख, शांति और संपत्ति की वृद्धि होती है। इन पक्षों का अनुसरण करके हम आत्मिक उन्नति और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

धार्मिक संस्कार और कृष्ण-शुक्ल पक्ष

धार्मिक संस्कारों में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का महत्वपूर्ण स्थान है। इन पक्षों के उपाय से हम अपने आत्मिक संयम को बढ़ा सकते हैं।

निष्कर्ष

कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों ही हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन पक्षों के महत्व को समझकर हम अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

The post कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष क्या है? appeared first on Click Jyotish.

]]>
https://clickjyotish.in/%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95/feed/ 0